जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच का फैसला
मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में हुई। बचाव पक्ष ने खराब स्वास्थ्य और अन्य आधारों पर राहत मांगी थी। हालांकि, सरकारी वकील और जांच एजेंसी के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराध समाज के खिलाफ होते हैं। IAS निरंजन दास पर पद का दुरुपयोग कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के पुख्ता आरोप हैं। ऐसे में जांच के इस पड़ाव पर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
सरकारी खजाने में हेराफेरी का गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की जांच एजेंसियों के अनुसार, आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर सिंडिकेट बनाकर उगाही की गई थी। इसमें निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर निजी हितों के लिए काम किया। घोटाले की रकम को अवैध रूप से खपाने और अघोषित संपत्ति अर्जित करने के आरोप में वे लंबे समय से जेल में हैं। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से अब उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
“आर्थिक अपराधों के मामलों में आरोपी की रसूख और गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए याचिका निरस्त की है।”
— विधिक सलाहकार, हाईकोर्ट बिलासपुर
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब निरंजन दास के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा है। राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही इस कार्रवाई पर आम नागरिकों की नजरें टिकी हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि रसूखदार अधिकारियों पर ऐसी कार्रवाई से प्रशासन में पारदर्शिता आएगी। बोदरी स्थित हाई कोर्ट परिसर में आज दिन भर वकीलों और मीडियाकर्मियों की गहमागहमी रही। आगामी दिनों में इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी फैसले आने की संभावना है।

More Stories
Naxalism Elimination Deadline March 2026 : छत्तीसगढ़ से 31 मार्च 2026 तक होगा नक्सलवाद का सफाया; गृहमंत्री ने तय की डेडलाइन
Air Force Wing Commander Suicide : पुरैना विधायक कॉलोनी में एयरफोर्स विंग कमांडर ने की खुदकुशी, फंदे पर लटकती मिली लाश
Naxals Surrender : मुख्यधारा में लौटे 108 माओवादी, आज शौर्य भवन में डालेंगे हथियार