प्रतिपदा तिथि और उदय काल का गणित
पंचांग के जानकारों के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 18 मार्च की रात से ही शुरू हो जाएगी, लेकिन शास्त्रों में उदय तिथि की महत्ता अधिक होती है। 19 मार्च को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन से नवरात्र के व्रत और कलश स्थापना का विधान श्रेष्ठ माना गया है। रायपुर के प्रमुख मंदिरों, जैसे पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर और बंजारी माता मंदिर में भी इसी दिन से विशेष अनुष्ठान शुरू होंगे।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त निकल रहे हैं। भक्तों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय के भीतर ही घटस्थापना पूर्ण कर लें:
- प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06:20 से 10:15 बजे तक (सबसे उत्तम)।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:45 से 12:35 बजे तक (बिना किसी बाधा के पूजन के लिए)।
ध्यान रहे कि राहुकाल के दौरान कलश स्थापना से बचना चाहिए, जो दोपहर के समय रहेगा।
“शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सूर्योदय व्यापिनी है। भक्त बिना किसी संशय के गुरुवार, 19 मार्च को कलश स्थापना कर सकते हैं। इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है जो साधना के लिए अत्यंत शुभ है।”
— पंडित रमेश शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, रायपुर
नवरात्र की आहट के साथ ही रायपुर के गोल बाजार, शास्त्री बाजार और सदर बाजार में पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं। मिट्टी के कलश, माता की चुनरी और अखंड जोत के लिए घी की मांग बढ़ गई है। प्रशासन ने भी शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से डोंगरगढ़ (बम्लेश्वरी माता) जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे और बस डिपो ने अतिरिक्त व्यवस्थाओं की घोषणा की है।

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