राउलगांव में सुबह का सन्नाटा चीख-पुकार में बदला
धमाका इतना शक्तिशाली था कि इसकी आवाज आसपास के कई किलोमीटर तक सुनी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह की शिफ्ट शुरू होने के कुछ ही देर बाद फैक्ट्री के कास्टिंग यूनिट में विस्फोट हुआ। देखते ही देखते परिसर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। 18 घायलों को तुरंत नजदीकी निजी अस्पतालों और नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से कई कर्मचारियों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
राहत और बचाव कार्य जारी
सूचना मिलते ही नागपुर ग्रामीण पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। फिलहाल एनडीआरएफ (NDRF) की टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस ने फैक्ट्री की घेराबंदी कर दी है ताकि जांच में कोई बाधा न आए। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि केमिकल मिक्सिंग के दौरान तापमान बढ़ने की वजह से यह हादसा हुआ होगा, हालांकि आधिकारिक कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
“यह एक बेहद दुखद घटना है। हमारी पहली प्राथमिकता घायलों को सर्वोत्तम उपचार प्रदान करना और मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हमने घटना के उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सुरक्षा मानकों में लापरवाही पाए जाने पर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
— डॉ. विपीन इटनकर, जिला कलेक्टर, नागपुर
हादसे की खबर फैलते ही फैक्ट्री के बाहर श्रमिकों के परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई है। लोग अपनों की तलाश में रोते-बिलखते देखे जा रहे हैं। प्रशासन ने नागपुर-उमरेड रोड के आसपास के इलाकों में ट्रैफिक को नियंत्रित किया है ताकि एंबुलेंस की आवाजाही में दिक्कत न हो। मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही मुआवजे की घोषणा की जा सकती है।

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