तेहरान/नई दिल्ली | अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हवाई हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने अपनी सत्ता के खालीपन को भरने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ईरान की लीडरशिप काउंसिल ने वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को देश का अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान अपने सबसे कठिन दौर और युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है।
कौन हैं अलीरेजा अराफी?
67 वर्षीय अलीरेजा अराफी ईरान की सत्ता संरचना में एक प्रभावशाली नाम रहे हैं। वे केवल एक धर्मगुरु ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में भी गहरा अनुभव रखते हैं:
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गार्जियन काउंसिल: वे गार्जियन काउंसिल के प्रमुख सदस्य हैं, जो ईरान के कानूनों और चुनावों पर नियंत्रण रखती है।
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असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स: अराफी उस शक्तिशाली संस्था का हिस्सा हैं जो सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है।
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तकनीकी समर्थक: उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा के बावजूद आधुनिक तकनीक और शिक्षा के विकास का समर्थक माना जाता है।
कैसे काम करेगी नई अंतरिम काउंसिल?
ईरान के संविधान के अनुसार, जब तक स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक एक अस्थायी नेतृत्व परिषद देश की कमान संभालेगी। इस परिषद में शामिल हैं:
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अयातुल्ला अलीरेजा अराफी (न्यायविद सदस्य के रूप में)
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मसूद पेजेशकियन (ईरान के राष्ट्रपति)
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गोलाम-होसैन मोहसेनी-एजी (ईरान के मुख्य न्यायाधीश)
भीषण हमले में खामेनेई समेत कई दिग्गजों की मौत
शनिवार को हुए इस हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) नाम दिया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान स्थित सुप्रीम लीडर के कार्यालय और आवास पर हुए सटीक हमले में खामेनेई की मौत हो गई।
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सैन्य नेतृत्व खत्म: इस हमले में केवल खामेनेई ही नहीं, बल्कि IRGC के प्रमुख मोहम्मद पाकपुर, रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख के भी मारे जाने की खबर है।
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ट्रंप की प्रतिक्रिया: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को “दुनिया के लिए न्याय” करार दिया है और ईरान को किसी भी जवाबी कार्रवाई पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

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