प्रयागराज | यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में घिरे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है और निर्णय आने तक पुलिस को उन्हें गिरफ्तार न करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
शंकराचार्य के खिलाफ एक महिला ने यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। इसी मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी दाखिल की थी।
सरकारी वकील की तीखी दलील: “वे बहुत ताकतवर हैं”
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सरकारी वकील ने अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया। सरकारी पक्ष की मुख्य दलीलें इस प्रकार थीं:
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प्रभावशाली व्यक्तित्व: सरकारी वकील ने तर्क दिया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उनके लाखों अनुयायी हैं।
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जांच पर असर: दलील दी गई कि यदि उन्हें अग्रिम जमानत दी जाती है, तो वे गवाहों को डरा-धमका सकते हैं और पुलिस की जांच प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं।
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गंभीर आरोप: आरोपों की प्रकृति को देखते हुए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ (Custodial Interrogation) जरूरी बताई गई।
बचाव पक्ष का पक्ष: “साजिश के तहत फंसाया गया”
दूसरी ओर, शंकराचार्य के वकीलों ने इन सभी आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि:
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यह पूरा मामला स्वामी जी की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है।
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शिकायतकर्ता के आरोपों में विरोधाभास है और वे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रही हैं।
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वे जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, इसलिए गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है।
कोर्ट का रुख
दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि वे मामले के सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही फैसला सुनाएंगे। तब तक के लिए गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रहेगी।

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