पुनर्वास नीति का मानवीय चेहरा: बंदूक छोड़ पर्यटन की ओर
बंदूक छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए इन लोगों के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया था। जंगल सफारी के दौरान उन्होंने वन्यजीवों को करीब से देखा और विकास के आधुनिक ढांचे को समझा। गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस दौरान उनके साथ एक आम नागरिक की तरह संवाद किया। भोजन के मेज पर हुई चर्चा में गृह मंत्री ने उनके परिवारों की स्थिति, बच्चों की शिक्षा और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बात की।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य अन्य सक्रिय नक्सलियों को यह संदेश देना है कि लोकतंत्र की मुख्यधारा में सम्मान और सुरक्षा दोनों मौजूद हैं। गृह मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से उनकी समस्याओं को सुना और अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
“ये हमारे ही भाई हैं जो भटक गए थे। आज ये मुख्यधारा में हैं और राज्य के विकास में भागीदार बनना चाहते हैं। जंगल सफारी का भ्रमण और साथ बैठकर भोजन करना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इस विश्वास को मजबूत करना है कि सरकार इनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
— विजय शर्मा, गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
इस पहल से बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक बड़ा सामाजिक संदेश गया है।
- भरोसे की बहाली: सुरक्षा बलों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के बीच संवाद की खाई कम होगी।
- सुरक्षा अपडेट: इस कार्यक्रम के कारण रायपुर और नया रायपुर के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे, हालांकि यातायात सुचारू बना रहा।
- आगामी योजना: राज्य सरकार अब इन पूर्व नक्सलियों के लिए विशेष कौशल विकास केंद्र खोलने की योजना बना रही है ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके।

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