अमेरिका का डर: क्या तकनीक में पिछड़ जाएगी सुपरपावर?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) की ताजा चीन अपनी सैन्य रणनीति को बदल रहा है। अब उसका ध्यान केवल बड़े विनाशकारी बमों पर नहीं, बल्कि ऐसे हथियारों पर है जो सटीक वार कर सकें। ये छोटे हथियार एडवांस न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी से लैस हैं। दावा है कि ये हथियार पारंपरिक परमाणु बमों की तुलना में कम रेडिएशन फैलाते हैं लेकिन लक्ष्य को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखते हैं। इससे युद्ध के मैदान में चीन की स्थिति बेहद मजबूत हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय: वैश्विक शक्ति संतुलन बिगड़ने का खतरा
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि चीन की यह रणनीति ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी परमाणु क्षमता विकसित करने की है। अगर ये हथियार युद्धपोतों या मोबाइल लॉन्चर्स पर तैनात कर दिए जाते हैं, तो अमेरिका के मिसाइल डिफेंस सिस्टम इन्हें ट्रैक नहीं कर पाएंगे। फिलहाल रूस ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन क्रेमलिन के सूत्रों का कहना है कि वे चीन की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं।
“चीन की यह नई रणनीति वैश्विक परमाणु व्यवस्था को खतरे में डाल रही है। ये छोटे हथियार युद्ध की परिभाषा बदल सकते हैं। अमेरिका को अपनी रक्षा प्रणाली को जल्द से जल्द अपडेट करना होगा, वरना हम तकनीकी दौड़ में पीछे छूट जाएंगे।”
— जॉन आर. विल्सन, वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक (अमेरिकी थिंक टैंक)
हालाँकि यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर की है, लेकिन इसका सीधा असर भारत जैसे पड़ोसी देशों की सीमाओं पर पड़ेगा। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत अपनी S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम और ‘अग्नि’ श्रृंखला की मिसाइलों को और अधिक अपग्रेड करने पर विचार कर सकता है। आने वाले हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र (UN) में इस मुद्दे पर गरमागरम बहस होने की उम्मीद है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी खबरों के लिए केवल प्रमाणित सरकारी स्रोतों पर ही भरोसा करें।

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