क्या है हेक्सागॉन अलायंस और रेडिकल खतरे?
इजरायल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेतन्याहू ने 22 फरवरी को हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना की रूपरेखा साझा की थी। यह गठबंधन विशेष रूप से दो मोर्चों पर काम करेगा: ‘रेडिकल शिया एक्सिस’ (ईरान समर्थित हमास, हिजबुल्लाह और हूती) और उभरते हुए ‘रेडिकल सुन्नी एक्सिस’ (ISIS जैसे नेटवर्क)। नेतन्याहू का मानना है कि भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ चुनिंदा अरब व अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी जो मध्य पूर्व के चारों ओर एक सुरक्षा कवच या ‘हेक्सागॉन’ की तरह काम करेगी।
नेतन्याहू का आधिकारिक बयान
“मेरी नजर में एक पूरी व्यवस्था बनेगी, जो मिडिल ईस्ट के आसपास या उसके अंदर एक ‘हेक्सागॉन’ की तरह काम करेगी। इसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी राष्ट्र और भूमध्यसागरीय देश जैसे ग्रीस और साइप्रस शामिल होंगे। मैं इसे व्यवस्थित तरीके से जल्द पेश करूंगा।”
— बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इजरायल
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन में भारत की मौजूदगी से हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच एक सीधा सुरक्षा गलियारा बनेगा। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान रक्षा सौदों, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर बड़े समझौतों की उम्मीद है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को सुरक्षा प्रदाता (Security Provider) के रूप में भी स्थापित करेगा।

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