रायपुर: छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे और नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराना नहीं है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में पूरी तरह स्थापित करना है। उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘पुनर्वास’ की असली जीत तभी है जब पूर्व नक्सली आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ जीवन जी सकें।
“आत्मसमर्पण के बाद का जीवन है असली चुनौती”
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जो युवा भटककर नक्सलवाद की राह पर चले गए थे, उनके लिए वापसी के द्वार हमेशा खुले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ‘नई पुनर्वास नीति-2025’ के तहत समर्पण करने वालों को न केवल सुरक्षा दी जाएगी, बल्कि:
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स्किल डेवलपमेंट: उनकी रुचि के अनुसार उन्हें विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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आर्थिक नींव: उन्हें अपना स्थायी व्यवसाय या खेती शुरू करने के लिए विशेष अनुदान और जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
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पारिवारिक स्थिरता: बच्चों की शिक्षा और परिवार के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी सरकार उठाएगी।
मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि केंद्र और राज्य सरकार का साझा लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक प्रदेश को सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि “नक्सली विचारधारा अब अपनी अंतिम सांसें ले रही है। बस्तर का युवा अब आईईडी (IED) नहीं, बल्कि हाथ में लैपटॉप और खेल का सामान चाहता है।”
विशेष संदेश: विजय शर्मा ने अपील की है कि नक्सली संगठन के निचले कैडर के लोग अपने नेतृत्व के धोखे को समझें और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने परिवार के पास वापस लौट आएं।

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