वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) को लेकर 23 से 26 फरवरी के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक फिलहाल टल गई है। यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक टैरिफ) को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया है।
क्यों टली बैठक?
भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में सबसे बड़ा पेंच टैरिफ की दरों का था। पहले के समझौते के अनुसार, भारत को अपने कुछ प्रमुख निर्यात पर 18% टैरिफ देना तय हुआ था। लेकिन शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के उन पुराने आदेशों को रद्द कर दिया जिनके आधार पर ये टैरिफ लगाए गए थे। इसके बाद भारत के लिए 18% टैरिफ का आधार ही खत्म हो गया। अब दोनों देश इस बात पर दोबारा चर्चा करेंगे कि नई कानूनी परिस्थितियों में समझौते का स्वरूप क्या होगा।
ट्रम्प का 15% का नया दांव
सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के महज कुछ घंटों के भीतर राष्ट्रपति ट्रम्प ने ‘प्लान-B’ लागू कर दिया।
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वैश्विक शुल्क: ट्रम्प ने घोषणा की कि वे सभी देशों (भारत समेत) पर 15% का ग्लोबल टैरिफ लगाएंगे।
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कानूनी आधार: इस बार उन्होंने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 का इस्तेमाल किया है, जो उन्हें अस्थाई रूप से (150 दिनों के लिए) टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
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भारत को राहत या नुकसान?: पहले तय हुए 18% के मुकाबले 15% का नया टैरिफ दर तकनीकी रूप से कम है, लेकिन यह एक ‘यूनिफॉर्म’ रेट है जो लगभग हर चीज़ पर लगेगा।
विशेषज्ञों की राय
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने भारत के हाथ मजबूत किए हैं। अब भारत 18% के बजाय और कम टैरिफ या पुरानी ‘जीएसपी’ (GSP) सुविधाओं की बहाली की मांग कर सकता है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि वे फिलहाल अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

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