युवा शक्ति का दबदबा: 30 से कम उम्र वालों का 80% कब्जा
भारत में एआई प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली कुल गतिविधि में 30 साल से कम उम्र के यूजर्स की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि कॉलेज जाने वाले छात्र और शुरुआती करियर वाले प्रोफेशनल्स अपनी पढ़ाई, कोडिंग, प्रोजेक्ट्स और डेली टास्क के लिए एआई पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं।
आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में स्मार्टफोन की आसान पहुंच और कम कीमत पर उपलब्ध डेटा ने इस रुझान को तेजी दी है। बेंगलुरु, हैदराबाद और गुरुग्राम जैसे टेक हब के अलावा अब टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा भी एआई का इस्तेमाल भाषाई अनुवाद और स्किल डेवलपमेंट के लिए कर रहे हैं।
Voices from the Ground / टेक विशेषज्ञों का मत
“भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड अब डिजिटल डिविडेंड में बदल रहा है। 18-24 साल के युवाओं की यह सक्रियता दिखाती है कि हमारा देश दुनिया का एआई बैकबोन बनने की राह पर है। शिक्षा से लेकर रोजगार तक, एआई अब एक अनिवार्य औजार बन चुका है।”
— डॉ. विकास राय, एआई एनालिस्ट
Impact on Residents / आपके जीवन पर क्या होगा असर?
एआई के इस बढ़ते चलन का स्थानीय स्तर पर सीधा प्रभाव पड़ेगा:
- एजुकेशन सेक्टर: कोचिंग सेंटर्स और यूनिवर्सिटीज में एआई आधारित लर्निंग टूल्स का उपयोग बढ़ेगा।
- रोजगार: युवाओं को अब ट्रेडिशनल स्किल्स के साथ एआई प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे नए हुनर सीखने होंगे।
- डिजिटल सुरक्षा: बढ़ती गतिविधि के साथ डेटा प्राइवेसी को लेकर जागरूकता और साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

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