SIR पर रार: सुप्रीम कोर्ट का असाधारण हस्तक्षेप
मतदाता सूची से नाम कटने और ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ (तार्किक विसंगति) को लेकर ममता सरकार और चुनाव आयोग के बीच ‘ट्रस्ट डेफिसिट’ (विश्वास की कमी) साफ दिख रही है। शुक्रवार को सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने इसे ‘असाधारण स्थिति’ करार दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि 294 जिला न्यायिक अधिकारी तैनात किए जाएं, जो मतदाता सूची के दावों और आपत्तियों का निपटारा करेंगे।
टीएमसी विधायक शौकत मोल्ला ने दक्षिण 24 परगना में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि निर्वाचन आयोग जानबूझकर अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सरकार घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
“दो संवैधानिक संस्थाओं (राज्य सरकार और चुनाव आयोग) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का खेल दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारियों को इस प्रक्रिया में शामिल करना पड़ रहा है।”

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