क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण और ‘रिंग ऑफ फायर’?
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है, लेकिन उसकी कोणीय दूरी पृथ्वी से इतनी अधिक होती है कि वह सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढक पाता। ऐसी स्थिति में सूर्य का मध्य भाग ढक जाता है और किनारों से तेज रोशनी दिखाई देती है, जो एक चमकती हुई अंगूठी की तरह लगती है। इसी कारण इसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ग्रहण अंटार्कटिका और हिंद महासागर के क्षेत्रों में सबसे स्पष्ट दिखाई देगा।
भारत में दृश्यता और सूतक काल के नियम
भारत के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि 17 फरवरी का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, ग्रहण के समय भारत में रात या शाम का समय होगा और ग्रहण का पथ भारत से होकर नहीं गुजरेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल मान्य नहीं होता। इसलिए, मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और सामान्य पूजा-पाठ पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी।
“यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के निर्जन इलाकों और अंटार्कटिका में प्रभावी रहेगा। भारत में भौगोलिक स्थिति के कारण यह दृश्यमान नहीं है, इसलिए यहां जनजीवन या धार्मिक गतिविधियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।”

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