कानपुर | 12 फरवरी, 2026 कानपुर के वीआईपी रोड पर ₹10 करोड़ की लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को रौंदने के आरोपी शिवम मिश्रा को पुलिस ने 90 घंटे बाद गिरफ्तार तो किया, लेकिन वह चंद घंटों में ही रिहा हो गया। कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए रिमांड पेपर्स में भारी कमियां पाईं और आरोपी को ₹20,000 के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।
पुलिस की ‘कमजोर’ दलील और कोर्ट की टिप्पणी
गुरुवार सुबह करीब 10 बजे पुलिस ने शिवम को गिरफ्तार कर एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) की कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने आगे की पूछताछ के लिए 14 दिन की न्यायिक रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
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प्रक्रियात्मक चूक: कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने गिरफ्तारी के समय BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के नियमों और अर्णेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया।
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नोटिस का अभाव: आरोपी के वकील अनंत शर्मा ने दलील दी कि पुलिस ने धारा 35(3) [पुराने कानून की 41A] के तहत जरूरी नोटिस नहीं दिया और सीधे गिरफ्तारी कर ली, जो कानूनन गलत है।
ड्राइवर की ‘सरेंडर’ थ्योरी फेल
इससे पहले, मामले को दबाने के लिए एक ‘ड्राइवर’ थ्योरी पेश की गई थी। आरोपी के ड्राइवर मोहन ने कोर्ट में सरेंडर करने की अर्जी दी थी, लेकिन कोर्ट ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “जब पुलिस जांच और सीसीटीवी में ड्राइवर का नाम ही नहीं है, तो सरेंडर कैसा?” पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने स्पष्ट किया कि फुटेज में शिवम को ही ड्राइविंग सीट से बाहर निकलते देखा गया है।
क्या था मामला?
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तारीख: 8 फरवरी, 2025 (रविवार)
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घटना: तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो ने ई-रिक्शा और मोटरसाइकिल सवारों को टक्कर मारी।
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विवाद: हादसे के तुरंत बाद बाउंसरों ने शिवम को दूसरी कार (फॉर्च्यूनर) में बिठाकर भगा दिया था। पुलिस पर आरोप लगे कि उन्होंने 18 घंटे तक एफआईआर में आरोपी का नाम “अज्ञात” रखा और उसे ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ दिया।
“कानून सबके लिए बराबर है, लेकिन पुलिस की प्रक्रियात्मक गलतियों की वजह से आरोपी को इतनी जल्दी राहत मिल गई। अब पुलिस इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।”

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