पीने के पानी में कीड़े और अमानवीय स्थिति
चैतन्य बघेल ने बताया कि जेल में स्वच्छता का स्तर बेहद चिंताजनक था। उन्होंने दावा किया कि पीने के लिए मिलने वाले पानी में कीड़े तैरते थे। जेल के बैरक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक ही छोटे से कमरे में खाना खाने और शौचालय (Toilet) का इंतजाम था। चैतन्य के अनुसार, वहां की स्थिति ऐसी थी कि इंसान का स्वास्थ्य बिगड़ना तय था। उन्होंने जेल के भीतर मिलने वाली चिकित्सा सुविधा पर भी सवाल उठाए।
‘कैदी ही डॉक्टर बन जाते थे’
सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए चैतन्य ने कहा कि जेल में स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है। उनके मुताबिक, कई बार बीमार होने पर अन्य कैदी ही इंजेक्शन लगाते थे क्योंकि पर्याप्त मेडिकल स्टाफ उपलब्ध नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्हें 170 दिनों तक ऐसी प्रताड़ना झेलनी पड़ी जो शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ देने वाली थी। चैतन्य को 3 जनवरी 2026 को अदालत से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया था।
“जेल की स्थिति बहुत खराब थी। वहां पीने के पानी में कीड़े मिलते थे और एक ही कमरे में खाने व शौचालय का इंतजाम था। मेडिकल स्टाफ की जगह कैदी ही एक-दूसरे को इंजेक्शन लगाते थे।” — चैतन्य बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे (कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में)



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