पहली बैठक में कौन-कौन शामिल
रायपुर के सिविल लाइंस इलाके में आयोजित इस बंद कमरे की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री विजय शर्मा मौजूद हैं। इसके अलावा गृह विभाग के सचिव, डीजीपी और नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी, गृह सचिव और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी बैठक में शामिल हुए हैं। बैठक स्थल के आसपास सुरक्षा कड़ी है। सुबह से ही पुलिस और केंद्रीय बलों की आवाजाही तेज रही।
मार्च 2026 तक क्या है सरकार का लक्ष्य
सूत्रों के अनुसार बैठक में ऑपरेशन की गति, क्षेत्रवार समीक्षा, इंटेलिजेंस इनपुट और राज्यों के बीच समन्वय पर चर्चा हो रही है। नक्सल प्रभावित इलाकों में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस, सड़क और संचार नेटवर्क को लेकर भी रणनीति बनाई जा रही है अधिकारियों ने बताया कि लक्ष्य साफ है—नक्सली नेटवर्क को निर्णायक रूप से कमजोर करना और हिंसक घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाना।
सरकारी पक्ष
“नक्सल प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास कार्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा। तय समयसीमा में ठोस नतीजे दिखेंगे।” — वरिष्ठ गृह मंत्रालय अधिकारी
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
बैठक के फैसलों का असर बस्तर संभाग समेत नक्सल प्रभावित जिलों में दिखेगा। सुरक्षा अभियान तेज होने के साथ सड़क निर्माण, मोबाइल कनेक्टिविटी और प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और आवश्यक सेवाओं पर असर न पड़े।

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