धान खरीदी का लक्ष्य और वास्तविक स्थिति
सरकार ने इस खरीफ विपणन वर्ष के लिए 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा था। लेकिन खरीदी केवल लगभग 140 लाख मीट्रिक टन तक ही पहुंच पाई। इससे लक्ष्य में करीब 20 लाख मीट्रिक टन की कमी रह गई। इसी वजह से अनुमानित तौर पर करीब 9 प्रतिशत किसान धान बेचने से वंचित रहे हैं।
किसानों की नाराजगी और प्रशासन की प्रतिक्रिया
किसान अब भी उम्मीद लगाए बैठے हैं कि धान खरीदी की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाएगा। कई किसान नेताओं ने कहा है कि पंजीयन और टोकन जारी करने में देरी के कारण वे धान बेच नहीं पाए। प्रशासन ने इस बारे में अब तक कोई नई घोषणा नहीं की है।
पिछले साल की तुलना
पिछले विपणन वर्ष में छत्तीसगढ़ ने धान खरीदी में उच्च उपलब्धि दर्ज की थी। सरकार ने तब करीब 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था और लक्ष्य के करीब रहा था। इस बार लक्ष्य पूरा न होने से किसान और विपक्ष दोनों ने सवाल खड़े किए हैं।
क्या आगे तिथि बढ़ाई जाएगी?
किसानों और विपक्षी दलों ने तिथि बढ़ाने की मांग की है, लेकिन राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग या जिला प्रशासन से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं आई है। इससे किसानों में चिंता और असमंजस बना हुआ है।
आगे का रास्ता
किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे स्थानीय खरीदी केंद्रों या सहकारी समितियों से संपर्क रखें। किसी भी नई सूचना के लिए जिला कार्यालयों से अपडेट लेते रहें। प्रशासन की तरफ से अगर खरीदी तिथि बढ़ाई जाती है तो तुरंत किसानों को सूचित किया जाएगा।



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