राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर फिर शुरू हो रही व्यवस्था
भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के मंत्री संगठन और सरकार के बीच सेतु बनें। इसी कड़ी में मंत्रियों को कहा गया है कि वे कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर उनके क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को सुनें और मौके पर या तय समयसीमा में समाधान सुनिश्चित करें। इसी मॉडल पर वर्ष 2024 में पहली बार इस व्यवस्था की शुरुआत की गई थी।
2024 में मिला था सकारात्मक फीडबैक
पिछले साल ठाकरे परिसर में हुई बैठकों के दौरान राजस्व, बिजली, आवास, सड़क, पेंशन और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई मामलों का त्वरित निराकरण हुआ था। पार्टी संगठन को जमीनी स्तर से मजबूत करने में इस पहल को असरदार माना गया। इसी कारण इसे दोबारा लागू करने का फैसला लिया गया है।
ठाकरे परिसर रहेगा केंद्र बिंदु
रायपुर का ठाकरे परिसर एक बार फिर गतिविधियों का केंद्र रहेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार प्रतिदिन अलग-अलग विभागों के मंत्री मौजूद रहेंगे। कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की समस्याएं लिखित और मौखिक रूप से रख सकेंगे। संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी समन्वय के लिए अलर्ट पर रखा जाएगा।
संगठन और सरकार के बीच सीधा संवाद
“कार्यकर्ताओं के माध्यम से जनता की समस्याएं सीधे मंत्रियों तक पहुंचें, यही इस पहल का उद्देश्य है। समाधान में देरी नहीं होनी चाहिए।”
— भाजपा संगठन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर
इस पहल से स्थानीय स्तर पर लंबित शिकायतों को सीधे राजधानी में उठाने का मंच मिलेगा। कई मामलों में जिला स्तर पर अटकी फाइलें तेज़ी से आगे बढ़ सकती हैं। पार्टी का दावा है कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ेगी और कार्यकर्ताओं की भूमिका मजबूत होगी।

More Stories
Digital Fraud of Rs 45 lakh : रिटायर्ड BSP कर्मी से 45 लाख की डिजिटल डकैती, फेसबुक पर वित्त मंत्री और सचिन तेंदुलकर के नाम से फंसाया
Big Police Action : ‘सायलेंट 777’ एप से चल रहा था IPL सट्टा, पुलिस ने घेराबंदी कर 4 सटोरियों को दबोचा
CG NEWS : छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस में बड़ा बदलाव’ विधायक संगीता सिन्हा को मिली ‘कमान’, बनाई गईं कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष