भर्ती प्रक्रिया पर कोर्ट का आदेश
हाई कोर्ट ने महसूस किया कि भर्ती प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं दिखी और दावा किया गया कि फिजिकल टेस्ट और मेरिट लिस्ट में अनियमितता थी। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए जाएँ जब तक जांच पूरी नहीं होती। अगली सुनवाई की तारीख 23 फरवरी तय की गई है।
अभ्यर्थियों की आपत्ति
कई जिलों के उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा कि फिजिकल टेस्ट में कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिला और परिणाम प्रभावित हुआ। यह आरोप मेरिट लिस्ट के हालिया अपडेट पर आधारित हैं।
मैदान से आवाज़ / अभ्यर्थियों का बयान
“हम चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी हो। अगर गड़बड़ियाँ सही पाई जाती हैं तो पूरे चयन को दोबारा किया जाना चाहिए।”
— एक याचिकाकर्ता अभ्यर्थी
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह आरोपों का उत्तर देगी और भर्ती प्रक्रिया की जांच सुरक्षा मानकों के साथ कराई जाएगी। पुलिस विभाग ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जा रहा है और सही प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।
असर और आगे क्या
इस आदेश से हजारों अभ्यर्थी अनिश्चितता में हैं। नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे युवा अब सुनवाई के अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं। भर्ती रोक के कारण रोजगार की उम्मीद पर फिलहाल विराम लग गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर इस प्रक्रिया में सुधार नहीं हुआ तो वे उच्च न्यायालय में भी अपील कर सकते हैं।



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