CG Breaking News , गरियाबंद। मानवता को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां पैसों की मांग पूरी न होने पर एक आदिवासी प्रसूता और उसके नवजात को निजी अस्पताल में कथित तौर पर पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। जिला पंचायत अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार जच्चा-बच्चा को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया जा सका।
मामला आदिवासी बहुल मैनपुर विकासखंड के मूचबहल गांव के मालिपारा वार्ड का है। यहां रहने वाली भुंजिया जनजाति की 23 वर्षीय गर्भवती महिला नवीना चींदा को प्रसव पीड़ा होने पर 18 तारीख को पड़ोसी राज्य ओडिशा के कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ स्थित एक निजी अस्पताल मां भंडारणी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। उसी दिन नवीना ने सामान्य प्रसव के जरिए एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद अस्पताल प्रबंधन ने नॉर्मल डिलीवरी के एवज में 20 हजार रुपए की मांग की। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटा पाना संभव नहीं था। नवीना की बेवा सास दोषो बाई ने बताया कि पैसे का इंतजाम करने में समय लगने पर अस्पताल प्रबंधन ने महिला और नवजात को छुट्टी देने से इनकार कर दिया और उन्हें अस्पताल में ही रोककर रखा गया।
दोषो बाई के मुताबिक, वह रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों से मदद मांगती रही, लेकिन पूरी रकम तुरंत जुटा पाना संभव नहीं हो सका। इस दौरान नवीना और उसके नवजात को पांच दिनों तक अस्पताल में ही रखा गया, जिससे परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया।
मामले की जानकारी मिलने पर जिला पंचायत अध्यक्ष ने इसे गंभीरता से लिया और अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन से चर्चा की। बातचीत और दबाव के बाद अस्पताल ने आखिरकार प्रसूता और नवजात को छुट्टी दी। इसके बाद जच्चा-बच्चा सकुशल अपने घर लौट पाए।

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