CG News , धमतरी। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़े बहुचर्चित घोटाले पर करीब 19 साल बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड में फर्जी दस्तावेजों के सहारे शिक्षाकर्मी बने और बाद में पदोन्नत होकर प्रधान पाठक बने 8 शिक्षकों को गुरुवार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
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जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 में हुई शिक्षाकर्मी भर्ती के दौरान नियमों की अनदेखी कर कई अभ्यर्थियों ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र और दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनकी नियुक्ति शिक्षाकर्मी के पद पर हो गई। समय के साथ ये फर्जी शिक्षाकर्मी पदोन्नत होते रहे और वर्तमान में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत थे।
शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
इस मामले को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा जांच कराई। जांच में पाया गया कि संबंधित शिक्षकों के प्रमाण पत्र अवैध और नियमों के विपरीत हैं। इसके बाद विभागीय जांच पूरी कर कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
8 प्रधान पाठकों की सेवा समाप्त
जांच रिपोर्ट के आधार पर गुरुवार को आदेश जारी कर 8 प्रधान पाठकों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है और यदि जांच में अन्य मामलों की पुष्टि होती है तो आगे और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सरकार से लिया वेतन भी जांच के दायरे में
सूत्रों के मुताबिक, बर्खास्त किए गए शिक्षकों ने वर्षों तक सरकार से वेतन और अन्य शासकीय लाभ भी प्राप्त किए हैं। अब यह भी जांच की जा रही है कि उनसे सरकारी धन की रिकवरी की जाएगी या नहीं। इस संबंध में कानूनी सलाह ली जा रही है।
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