मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। इलाके में मौतों की संख्या बढ़कर 20 तक पहुंच चुकी है, लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में सिर्फ 4 मौतें होने की बात स्वीकार की है। वहीं दूसरी ओर, सरकार 18 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता पहले ही दे चुकी है।
इस विरोधाभास ने प्रशासन और सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दूषित पानी पीने से एक के बाद एक मौतें हुईं और श्मशान घाटों में लगातार चिताएं जलीं, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों में मौतों की संख्या कम दिखाई जा रही है।
RailOne App : यात्रियों के लिए नई सुविधा, RailOne ऐप पर मिलेंगे सभी टिकट बुकिंग विकल्प
हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार, दूषित पानी से केवल चार लोगों की मौत हुई है। जबकि प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 18 परिवारों को मुआवजा दिया जाना इस बात की पुष्टि करता है कि मौतों की संख्या इससे कहीं अधिक है।
इस मामले पर मुख्यमंत्री ने भी प्रतिक्रिया दी है। सीएम ने कहा कि सरकार आंकड़ों में उलझने के बजाय पीड़ित परिवारों की मदद पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राहत और उपचार सरकार की प्राथमिकता है, न कि संख्या को लेकर विवाद।
हालांकि विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस बयान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर मौतें कम थीं, तो मुआवजा अधिक परिवारों को क्यों दिया गया, और अगर मौतें ज्यादा हैं, तो सरकार हाईकोर्ट में सही आंकड़े क्यों नहीं पेश कर रही।

More Stories
Instagram Facebook Digital Bedtime: बच्चों की सुरक्षा के लिए Meta का बड़ा कदम, नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड भी मिलेगा
Ankit Baliyan Murder: स्कॉर्पियो में बैठने ही वाले थे अंकित बालियान, बाइक सवार बदमाशों ने बरसा दीं 20 गोलियां
BREAKING NEWS : नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही, 162 की मौत; सैकड़ों लापता, 133 भारतीय भी शामिल