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April 11, 2026

वेब न्यूज़ पोर्टल संघर्ष के स्वर

संघर्ष ही सफलता की पहली सीढ़ी है।

Vande Bharat Sleeper Version-2 : बुलेट जैसी रफ्तार, मखमल जैसा सफर: 180 kmph की स्पीड पर भी नहीं छलका ग्लास का पानी, वंदे भारत स्लीपर का सफल ट्रायल

Vande Bharat Sleeper Version-2 : कोटा/नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने मंगलवार को आधुनिकता और स्वदेशी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर गाड़ दिया। पश्चिम-मध्य रेलवे के कोटा-नागदा रेल खंड पर वंदे भारत स्लीपर (वर्जन-2) का फाइनल हाई स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दौरान ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रतिघंटा की तूफानी रफ्तार भरी, लेकिन इसकी स्थिरता का आलम यह था कि कोच के भीतर रखे पानी के ग्लास से एक बूंद पानी भी बाहर नहीं छलका।

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180 की स्पीड और स्थिरता का ‘अग्निपरीक्षा’

मंगलवार शाम करीब 4 बजे 16 कोच वाली इस ‘न्यू जनरेशन’ ट्रेन को कोटा से नागदा (225 किमी) के लिए रवाना किया गया। रामगंजमंडी के बाद जैसे ही लोको पायलट ने रफ्तार का कांटा 180 किमी/घंटा पर पहुंचाया, पूरी टीम की नजरें वहां रखे पानी के गिलासों पर टिक गईं।

  • नतीजा: उच्च गति और मोड़ों के बावजूद ट्रेन के भीतर कंपन (Vibration) इतना कम था कि गिलासों का पानी स्थिर रहा। यह भारतीय ट्रैक और स्वदेशी सस्पेंशन सिस्टम की बड़ी जीत मानी जा रही है।

रेल मंत्री ने कहा- ‘न्यू जनरेशन ट्रेन’

सफल ट्रायल के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रेन का वीडियो साझा करते हुए इसे ‘न्यू जनरेशन’ ट्रेन करार दिया। उन्होंने इसे भारतीय रेलवे के भविष्य के लिए एक बड़ा क्रांतिकारी कदम बताया। यह ट्रेन अब जल्द ही यात्रियों के लिए लंबी दूरी के सफर को आसान बनाने के लिए पटरियों पर उतरेगी।

सुरक्षा और तकनीक की गहन जांच

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन के मुताबिक, ट्रायल के दौरान केवल रफ्तार ही नहीं, बल्कि कई तकनीकी पहलुओं को जांचा गया:

  • आपातकालीन ब्रेक प्रणाली: हाई स्पीड के दौरान अचानक ब्रेक लगाने पर ट्रेन की प्रतिक्रिया।

  • दोलन और कंपन: उच्च गति पर कोच के भीतर यात्रियों को होने वाले अनुभव की स्थिरता।

  • संरक्षा प्रणाली: ऑटोमैटिक फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा मानकों का सफल परीक्षण।

हवाई जहाज जैसी सुविधाएं, घर जैसा आराम

यह 16 कोच वाली स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी के यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसकी खासियतों में शामिल हैं:

  • आरामदायक बर्थ: नई पीढ़ी के गद्दे और बेहतर स्पेस।

  • एडवांस सस्पेंशन: जो झटकों को पूरी तरह सोख लेता है।

  • सुरक्षा: चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी, डिजिटल सूचना प्रणाली और ऑटोमैटिक गेट।

  • आधुनिक टॉयलेट्स: विश्वस्तरीय साफ-सफाई और ऊर्जा दक्ष प्रणालियां।

बड़े अधिकारियों की मौजूदगी

ट्रायल के दौरान मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग और मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा समेत रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियरों की पूरी टीम मौजूद रही। सभी मानकों पर खरी उतरने के बाद अब इस स्लीपर रेक को कमर्शियल रन के लिए हरी झंडी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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