नई दिल्ली। अरावली पहाड़ियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा संरक्षित है और सरकार पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अरावली क्षेत्र के लगभग 90 फीसदी इलाके को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है।
भूपेंद्र यादव ने माइनिंग लीज और अवैध खनन के मुद्दे पर कहा कि जहां वैध खनन की अनुमति है, वहां नियमों और पर्यावरणीय शर्तों के तहत ही गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। अवैध खनन को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ राज्य और केंद्र स्तर पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि अरावली पहाड़ियां न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए अहम हैं, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता और वायु शुद्धता में भी इनकी बड़ी भूमिका है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की नीति पर काम कर रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि पर्यावरणीय कानूनों के दायरे में ही होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। अरावली को लेकर फैली भ्रांतियों पर विराम लगाते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक धरोहर की रक्षा करना है, न कि उसे नुकसान पहुंचाना।



More Stories
Major Embarrassment For Pakistani Army : बलूच लड़ाकों के कब्जे में रोते दिखे पाक सैनिक, कहा- ‘हमें मरने के लिए छोड़ दिया, सरकार को हमारी परवाह नहीं’
Chaos At Bharat Mandapam : AI समिट में घुसे यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता, शर्ट उतारकर किया प्रदर्शन; बिहार-यूपी के पदाधिकारियों की हुई पहचान
Air Service : 29 मार्च से शुरू होगी उड़ान, बिलासपुर में होगा स्टॉपेज’ जानें किराया और पूरा शेड्यूल